रायपुर। मालवीय रोड स्थित ऐतिहासिक श्री आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में आयोजित 10 दिवसीय ग्रीष्मकालीन श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर का बुधवार को भव्य समापन हुआ। पुरस्कार वितरण, प्रमाण पत्र सम्मान और विद्वत अभिनंदन के साथ आयोजित समापन समारोह में धर्म, संस्कार और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला।
शिविर का आयोजन संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की प्रेरणा तथा श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान के सानिध्य में किया गया। 10 दिनों तक चले इस शिविर में बच्चों, युवाओं, महिलाओं एवं श्रद्धालुओं ने जैन धर्म, संस्कारों और धार्मिक क्रियाओं का गहन अध्ययन किया।
समापन समारोह को संबोधित करते हुए बड़ा मंदिर के मैनेजिंग ट्रस्टी सनत जैन ने कहा कि शिविर की सबसे बड़ी विशेषता उसका अनुशासन रहा। सुबह अभिषेक-शांतिधारा से लेकर रात्रि की कक्षाओं तक सभी प्रतिभागियों ने समय का पूर्ण पालन किया। उन्होंने बताया कि बड़ा मंदिर में वर्षों से इस प्रकार के शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य नई पीढ़ी को धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ना है।
शिविर के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जयपुर से आए विद्वान अभिषेक जैन शास्त्री “आयांश”, शरद जैन शास्त्री तथा रायपुर के सौरभ जैन शास्त्री का ट्रस्ट एवं कार्यसमिति द्वारा शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। वहीं शिविर के दौरान आयोजित परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी बच्चों, बालिकाओं, युवाओं और महिलाओं को पुरस्कार एवं योग्यता प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
समारोह में रायपुर जैन समाज की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों, ट्रस्ट पदाधिकारियों, महिला मंडल की प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में शिविरार्थियों और श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थितजनों के लिए सात्विक स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई और मंगलमय वातावरण में शिविर का समापन हुआ।यह आयोजन न केवल धार्मिक शिक्षा का माध्यम बना, बल्कि नई पीढ़ी में संस्कार, अनुशासन और आध्यात्मिक चेतना का संचार करने का एक सफल प्रयास भी सिद्ध हुआ।