नई दिल्ली,। अमेरिका के साथ प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। प्रमुख विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताया है।कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह समझौता भारत की आर्थिक और कृषि नीतियों पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जल्दबाजी में ऐसे प्रावधानों को स्वीकार किया है, जिनसे घरेलू उद्योगों और किसानों को नुकसान हो सकता है। उनके अनुसार, विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में आयात को लेकर दी गई संभावित रियायतें चिंता का विषय हैं।उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े टैरिफ फैसलों को लेकर उत्पन्न अनिश्चितता के बीच इस तरह के समझौते पर आगे बढ़ना उचित नहीं है। कांग्रेस का मानना है कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में हो रहे बदलावों को देखते हुए भारत को सतर्क रुख अपनाना चाहिए।पार्टी ने मांग की है कि इस अंतरिम समझौते को फिलहाल स्थगित कर दिया जाए और इसकी शर्तों पर नए सिरे से व्यापक समीक्षा की जाए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार को सभी हितधारकों—किसानों, उद्योग संगठनों और व्यापार विशेषज्ञों—से चर्चा के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेना चाहिए।वहीं, सरकार की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पहले भी केंद्र सरकार यह स्पष्ट कर चुकी है कि किसी भी व्यापार समझौते में देश के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार का कहना रहा है कि ऐसे समझौते निवेश बढ़ाने, निर्यात को प्रोत्साहन देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में सहायक हो सकते हैं।इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं, खासकर तब जब वैश्विक व्यापार नीतियों में लगातार बदलाव हो रहे हैं और भारत अपनी आर्थिक रणनीति को नए सिरे से परिभाषित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।