रायपुर,। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी मामले में शारीरिक संबंध के दौरान “पेनिट्रेशन” (प्रवेश) सिद्ध नहीं होता है, तो ऐसे कृत्य को बलात्कार नहीं बल्कि “बलात्कार का प्रयास” माना जाएगा।अदालत ने एक पुराने प्रकरण की सुनवाई के दौरान यह निर्णय सुनाते हुए आरोपी की सजा में संशोधन किया। पहले आरोपी को बलात्कार का दोषी ठहराया गया था, लेकिन साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने पाया कि घटना में पेनिट्रेशन सिद्ध नहीं हो पाया। इसके चलते अदालत ने अपराध की प्रकृति को बदलते हुए आरोपी को “रेप के प्रयास” का दोषी माना।कोर्ट ने अपने फैसले में भारतीय दंड संहिता धारा 375 और भारतीय दंड संहिता धारा 511 का उल्लेख करते हुए कहा कि बलात्कार के अपराध में पेनिट्रेशन का होना आवश्यक तत्व है। इसके अभाव में मामला प्रयास की श्रेणी में आता है, जो कानून के तहत दंडनीय है।यह फैसला आपराधिक मामलों में साक्ष्य और कानूनी व्याख्या के दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में ऐसे मामलों की सुनवाई में स्पष्टता आएगी और न्यायिक प्रक्रिया को दिशा मिलेगी।