बंबूरडीह, रामाडबरी स्थित शासकीय भूमि को उद्योग एवं आश्रम के लिए आबंटित किए जाने के प्रस्ताव पर ग्रामीणों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना ग्रामसभा की जानकारी के भूमि आवंटन की प्रक्रिया न केवल नियमों के खिलाफ है,
बल्कि इससे धार्मिक आस्था, पर्यावरण और वन्यजीवों के अस्तित्व पर भी गंभीर संकट उत्पन्न होगा।ग्रामीणों को इस्तेहार के माध्यम से जानकारी मिली कि पटेवा राजस्व निरीक्षण मंडल अंतर्गत खसरा नंबर 932, 940, 944 एवं 974 की कुल 7.10 हेक्टेयर शासकीय एवं सिंलिंग भूमि को उद्योग स्थापना के लिए प्रस्तावित किया गया है।
इस भूमि पर एक ऐतिहासिक पर्वत स्थित है, जहां पर्रापाट देवालय मौजूद है, जो आसपास के गांवों के लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है।ग्रामीणों ने बताया कि उक्त भूमि से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर मुंगई माता पहाड़ी स्थित है,

जहां से जंगली जानवर बंबूरडीह की पहाड़ी तक विचरण करने आते हैं। यदि यहां किसी प्रकार का उद्योग स्थापित किया जाता है, तो वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर गंभीर खतरा उत्पन्न होगा।ग्रामीणों का यह भी कहना है कि संबंधित भूमि चारागाह के रूप में सुरक्षित है, जिस पर पशुपालन निर्भर है। भूमि का औद्योगिक उपयोग ग्रामीण आजीविका को भी प्रभावित करेगा।ग्रामवासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ग्राम पंचायत के सरपंच या सचिव द्वारा ग्रामीणों की जानकारी एवं सहमति के बिना कोई प्रस्ताव भेजा गया है

, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित जनप्रतिनिधियों की होगी। साथ ही, यदि बिना ग्रामीणों की सहमति भूमि का आवंटन किया गया, तो समस्त ग्रामवासी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।इस संबंध में ग्रामवासियों ने महासमुंद कलेक्टर, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार के समक्ष लिखित आपत्ति दर्ज कराते हुए मांग की है कि उक्त शासकीय भूमि को किसी भी उद्योग या आश्रम के लिए आवंटित न किया जाए।
