पंडरिया (कबीरधाम)।विश्व मातृभाषा दिवस के पावन अवसर पर “पानी बचाओ-बानी बचाओ” अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक पदयात्रा की शुरुआत की गई है। जल और मातृभाषा के संरक्षण का संदेश देने के उद्देश्य से शुरू हुए इस अभियान में समाज के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया गया है।अभियान की शुरुआत आज सुबह हुई, जब चार साथियों की टीम रायपुर और बिलासपुर से रवाना होकर पंडरिया पहुंची। यहां से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित हॉफ नदी के उद्गम स्थल से पदयात्रा का शुभारंभ किया जाएगा।इस पदयात्रा के प्रथम चरण में दो दिनों के भीतर करीब 50 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी। यात्रा के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क कर लोगों को जल संरक्षण, जल स्रोतों के महत्व और मातृभाषा के संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। अभियान से जुड़े लोग गांव-गांव जाकर यह संदेश देंगे कि पानी और भाषा दोनों ही जीवन और संस्कृति के आधार हैं।यात्रा का पहला पड़ाव कल शाम 4 बजे पंडरिया में समाप्त होगा, जहां स्थानीय लोगों की उपस्थिति में एक जागरूकता सभा का आयोजन भी किया जाएगा। इस दौरान अभियान के उद्देश्यों पर चर्चा की जाएगी और लोगों से इसमें सहभागी बनने की अपील की जाएगी।अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि आज पूरी दुनिया में जल संकट गहराता जा रहा है, वहीं तेजी से बदलती जीवनशैली के कारण मातृभाषाएं भी उपेक्षा का शिकार हो रही हैं। ऐसे समय में “पानी बचाओ-बानी बचाओ” जैसी पहल समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करेगी।इस पदयात्रा के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि यदि अभी से जल और भाषा के संरक्षण के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को बचाने की दिशा में एक सराहनीय कदम माना जा रहा है।