रायपुर,। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कथित नवजात अदला-बदली मामले को लेकर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (आप) ने एक बार फिर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष प्रियंका शुक्ला ने प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने और एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पीड़ित परिवार को अब तक न्याय नहीं मिला है।यह पूरा मामला रायपुर के एक आईवीएफ सेंटर से जुड़ा है, जहां दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी दंपत्ति ने संतान प्राप्ति के लिए इलाज कराया था। आरोप है कि दिसंबर 2023 में जुड़वा बच्चों के जन्म के बाद अस्पताल द्वारा दी गई जानकारी और वास्तविक स्थिति में अंतर था। परिजनों का दावा है कि एक बेटा और एक बेटी होने की सूचना दी गई, लेकिन उन्हें दोनों लड़कियां सौंप दी गईं, जिससे अदला-बदली का संदेह गहरा गया।पीड़ित परिवार ने निजी स्तर पर डीएनए जांच कराई और न्याय के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। मामला पहले हाईकोर्ट तक गया, जहां राहत नहीं मिलने पर इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप के बाद जनवरी 2026 में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए, लेकिन कार्रवाई में देरी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।प्रियंका शुक्ला ने आरोप लगाया कि राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार आरोपियों को बचाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी जांच की गति बेहद धीमी है और अब तक बच्चे का कोई पता नहीं चल सका है। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग और राज्य महिला आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए।आप नेता इमरान खान ने भी इस मामले को “लिंग आधारित भेदभाव और गंभीर लापरवाही” करार देते हुए कहा कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह मामला प्रदेश में बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है।पार्टी ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों की जल्द गिरफ्तारी हो और पीड़ित परिवार को उनका बच्चा वापस दिलाया जाए।