रायपुर। भारत रत्न डॉ. भीमराव आम्बेडकर जी की 135वीं जयंती के अवसर पर राजधानी रायपुर में आयोजित “RAIPUR SINGING TALENT HUNT” कार्यक्रम ने सांस्कृतिक उत्सव को एक नई ऊंचाई दी। यह आयोजन केवल एक सिंगिंग प्रतियोगिता नहीं, बल्कि बाबा साहेब के विचारों—समता, न्याय और बंधुत्व—को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनकर उभरा।
कार्यक्रम का शुभारंभ बुद्ध वंदना के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित सभी लोगों ने श्रद्धा और अनुशासन के साथ भाग लिया। इसके बाद शुरू हुआ सुरों का ऐसा सिलसिला, जिसने पूरे माहौल को संगीतमय और ऊर्जावान बना दिया। शहरभर से आए प्रतिभागियों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति देकर दर्शकों का दिल जीत लिया।


प्रतिभागियों ने विशेष रूप से बॉलीवुड के पुराने और लोकप्रिय गीतों को अपनी आवाज़ में ढालकर प्रस्तुत किया, जिससे दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे। हर प्रस्तुति के बाद तालियों की गूंज यह दर्शा रही थी कि मंच पर मौजूद हर कलाकार ने लोगों के दिलों में अपनी जगह बना ली है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने इसकी भव्यता को और बढ़ा दिया।

निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों के प्रदर्शन का गंभीरता और निष्पक्षता के साथ मूल्यांकन किया। जजों ने जहां उत्कृष्ट प्रस्तुतियों की सराहना की, वहीं प्रतिभागियों को उनकी कमियों से भी अवगत कराया, ताकि वे भविष्य में और बेहतर कर सकें। जजों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फाइनल राउंड में किसी भी प्रकार की त्रुटि को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और केवल सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा को ही विजेता चुना जाएगा। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि मंच उनका है और उन्हें बिना किसी झिझक के अपनी प्रतिभा को खुलकर प्रस्तुत करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान समय-समय पर “जय भीम” के नारों से वातावरण गूंजता रहा। बाबा साहेब आम्बेडकर के संघर्ष, उनके विचारों और संविधान निर्माण में उनके योगदान को भी भावपूर्ण तरीके से याद किया गया। संविधान और सामाजिक समानता पर आधारित गीतों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को एक सामाजिक संदेश से भी जोड़ दिया।