रायपुर*।छत्तीसगढ़ के जांजगीर–चाम्पा जिले से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता राघवेन्द्र रामसरकार पाण्डेय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुआ है। अमेरिका की सीडरब्रुक यूनिवर्सिटी ने शिक्षा के प्रसार, सामाजिक समरसता और ग्राम विकास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें स्वर्ण पदक के साथ डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (मानद पीएचडी) की उपाधि प्रदान की है। यह सम्मान समाज के लिए किए गए उनके निरंतर प्रयासों को वैश्विक स्तर पर मिली पहचान माना जा रहा है।जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह 22 फरवरी को नई दिल्ली के एक प्रतिष्ठित होटल में आयोजित किया गया था, जहां विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। राघवेन्द्र पाण्डेय को भी इसी समारोह में सम्मानित किया जाना था, लेकिन व्यक्तिगत कारणों के चलते वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी डिग्री, स्वर्ण पदक और अन्य सम्मान सामग्री उन्हें भेज दी।विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें यह अधिकार भी प्रदान किया गया है कि वे समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले योग्य व्यक्तियों के नाम भविष्य में मानद उपाधि के लिए अनुशंसित कर सकते हैं। इसे विश्वविद्यालय द्वारा उनके कार्यों पर जताए गए विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।शिक्षा और समाज सेवा से जुड़ा लंबा सफरराघवेन्द्र पाण्डेय लंबे समय से सामाजिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत जरूरतमंद बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलाने में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने, सामाजिक समरसता को मजबूत करने और गांवों में विकास से जुड़े कार्यों में भी उन्होंने सक्रिय भागीदारी निभाई है। उनके प्रयासों से कई परिवारों को अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का अवसर मिला है।सामाजिक कार्यों को प्रशासनिक स्तर पर भी मिली सराहनाराघवेन्द्र पाण्डेय के सामाजिक योगदान को जिला स्तर पर भी सम्मान मिला है। वर्ष 2015 में जिला प्रशासन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में उन्हें समाज सेवा के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए सम्मानित किया गया था। वहीं वर्ष 2019 में जिला पंचायत के प्रतिवेदन के आधार पर उनके नाम को प्रतिष्ठित व्यक्तियों की सूची में शामिल कर राजभवन भेजा गया, जिसे उनके सामाजिक योगदान की महत्वपूर्ण पहचान माना गया।छात्र राजनीति से जन आंदोलनों तक सक्रियराघवेन्द्र पाण्डेय का सामाजिक और जन सरोकारों से जुड़ाव छात्र जीवन से ही रहा है। वे छात्रसंघ अध्यक्ष और विश्वविद्यालय उपाध्यक्ष के रूप में सक्रिय रहे और उस दौर में कई छात्र आंदोलनों में भागीदारी निभाई। छत्तीसगढ़ राज्य के गठन से पहले क्षेत्र में चले आंदोलनों और जनभावनाओं से भी उनका जुड़ाव रहा।उनका मानना है कि छत्तीसगढ़ का निर्माण केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि लंबे समय से चली आ रही जन आकांक्षाओं और संघर्षों का परिणाम है।समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में उनकी सक्रियता के कारण मिला यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान न केवल उनके लिए बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए इसे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक बताया।