शहीद दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में डीएड चयनित अभ्यर्थियों का अनोखा और भावुक प्रदर्शन देखने को मिला। अपने संवैधानिक अधिकारों और न्याय की मांग को लेकर करीब 2300 अभ्यर्थियों ने शहीदों का रूप धारण कर विरोध दर्ज कराया।अभ्यर्थियों ने शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का भेष धारण कर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इस दौरान कई युवाओं ने अपने हाथों में हथकड़ी पहनकर यह संदेश देने की कोशिश की कि आज का युवा अपने ही अधिकारों के लिए बेड़ियों में जकड़ा हुआ है।

तूता धरना स्थल से शिक्षा मंत्री निवास तक निकाली गई रैली में अभ्यर्थियों का आक्रोश और पीड़ा साफ झलक रही थी। हाथों में तख्तियां और हथकड़ियां लिए ये युवा सरकार से सिर्फ अपनी नियुक्ति की मांग कर रहे थे।हालांकि, प्रदर्शनकारियों को शिक्षा मंत्री निवास पहुंचने से पहले ही पुलिस प्रशासन द्वारा रोक दिया गया, जिससे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने आए युवाओं को निराशा हाथ लगी।

उल्लेखनीय है कि ये अभ्यर्थी पिछले कई महीनों से आमरण अनशन, धरना और रैली के माध्यम से अपनी मांगों को उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।शहीद दिवस के मौके पर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया कि क्या यही वह भारत है, जिसका सपना देश के वीर शहीदों ने देखा था—जहां युवा अपने हक के लिए हथकड़ी पहनने को मजबूर हो।
अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की है कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सम्मान करते हुए सभी 2300 डीएड अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द नियुक्ति दी जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।