रायपुर।एक तरफ अपने भविष्य की उम्मीदें, दूसरी तरफ सिस्टम से न्याय की आस… इन्हीं दो छोरों के बीच झूल रहे छत्तीसगढ़ के सैकड़ों डीएलएड (डीएड) अभ्यर्थी आज 80वें दिन भी नया रायपुर के तूता धरना स्थल पर आमरण अनशन पर डटे हुए हैं। तीन महीनों से अधिक समय से चल रहा यह आंदोलन अब सिर्फ नौकरी की मांग नहीं, बल्कि युवाओं के टूटते सपनों और संघर्ष की मार्मिक कहानी बन चुका है।
इन अभ्यर्थियों की आंखों में कभी शिक्षक बनने का सपना था—स्कूल में बच्चों को पढ़ाने का, समाज में बदलाव लाने का। लेकिन आज वही युवा खुले आसमान के नीचे, तपती धूप और ठंडी रातों के बीच, अपने हक के लिए लड़ने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि सहायक शिक्षक भर्ती 2023 में गंभीर लापरवाही और अनियमितताओं के कारण सैकड़ों पात्र उम्मीदवार आज भी नियुक्ति से वंचित हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद शिक्षा विभाग ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। भर्ती प्रक्रिया के दौरान बिना मेरिट सूची का सही तरीके से पुनर्गठन किए स्कूल आवंटन कर दिया गया, जिससे बड़ी संख्या में अपात्र लोगों को मौका मिल गया, जबकि असली हकदार पीछे छूट गए। यही कारण है कि करीब 1316 पात्र अभ्यर्थी आज भी अपने अधिकार के लिए सड़कों पर हैं।

लेकिन बीती रात ने इन संघर्षरत युवाओं की परीक्षा और भी कठिन बना दी। रात करीब 3 बजे अचानक आए तेज आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश ने धरना स्थल को तहस-नहस कर दिया। टेंट उखड़ गए, गद्दे और चटाइयां उड़ गईं, कई जरूरी सामान पानी में भीगकर खराब हो गए। कुछ ही मिनटों में जैसे सब कुछ बिखर गया—सिर्फ सामान ही नहीं, बल्कि उन उम्मीदों का सहारा भी, जो इन टेंटों के नीचे टिकी हुई थीं।
कई अभ्यर्थियों ने पूरी रात खुले आसमान के नीचे बिताई। भीगे कपड़े, ठंडी हवा और अनिश्चित भविष्य—इन सबके बीच भी किसी ने धरना नहीं छोड़ा। कुछ की आंखों में आंसू थे, तो कुछ ने दांत भींचकर खुद को संभाला। एक अभ्यर्थी ने कहा, “हमने इतने दिन संघर्ष किया है, अब पीछे नहीं हटेंगे। चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, हम अपने हक के लिए लड़ते रहेंगे।”
यह दृश्य सिर्फ एक आंदोलन का नहीं, बल्कि उस जिद और जज्बे का है, जो आज के युवाओं के भीतर जिंदा है। वे थके जरूर हैं, टूटे नहीं हैं। उनका कहना है कि अगर शुरुआत में ही पारदर्शी और नियमों के अनुसार प्रक्रिया अपनाई जाती, तो आज उन्हें इस हालात का सामना नहीं करना पड़ता।डीएलएड अभ्यर्थी संघ छत्तीसगढ़ ने सरकार और प्रशासन से भावुक अपील की है कि उनकी पीड़ा को समझा जाए और जल्द से जल्द 2300 सहायक शिक्षक पदों पर पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए। उनका कहना है कि यह सिर्फ नौकरी का सवाल नहीं, बल्कि उनके जीवन, उनके परिवार और उनके भविष्य का सवाल है।
धरना स्थल पर बिखरे टेंट और भीगे सामान आज भी उस रात की कहानी कह रहे हैं, लेकिन उन सबके बीच खड़े ये युवा एक और कहानी लिख रहे हैं—संघर्ष, धैर्य और उम्मीद की… जो शायद किसी दिन उन्हें उनका हक दिलाकर ही खत्म होगी।