रायपुर। जरूरतमंद युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें नया कौशल सिखाने के उद्देश्य से रोटरी क्लब एलिगेंस, रायपुर ने हाल ही में “मेहंदी कला – हुनर और उम्मीद” नामक कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यक्रम 15 से 22 वर्ष आयु वर्ग की लड़कियों और युवतियों के लिए डिजाइन किया गया था, ताकि वे अपने रचनात्मक हुनर को विकसित कर सकें और इसे भविष्य में आर्थिक अवसर में बदल सकें।

कार्यशाला 12 मार्च से 16 मार्च तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से 5 बजे तक चली। प्रशिक्षण में युवतियों को मेहंदी के विविध डिज़ाइन, पैटर्न और तकनीकें सिखाई गईं। इसके साथ ही उन्हें यह भी बताया गया कि कैसे इस कला को छोटे व्यवसाय या फ्रीलांस अवसर में बदला जा सकता है।

कार्यशाला का उद्देश्य केवल कला सिखाना नहीं था, बल्कि युवतियों में आत्मविश्वास, अनुशासन और सृजनात्मक सोच विकसित करना भी था। प्रशिक्षकों ने कहा कि जब युवतियां अपने हुनर के माध्यम से कुछ नया सीखती हैं और करियर या आय के अवसर तलाशती हैं, तो उनका आत्मसम्मान और निर्णय क्षमता दोनों बढ़ती हैं।रोटरी क्लब एलिगेंस की अध्यक्ष नीरू अग्रवाल और सचिव तनुश्री अग्रवाल ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम युवतियों को आत्मनिर्भर बनने और अपने हुनर के माध्यम से समाज में अपनी पहचान बनाने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने बताया कि इस पहल से युवतियों के रचनात्मक कौशल के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है।कार्यशाला के पंजीकरण और समन्वय की जिम्मेदारी निशा नवीन अग्रवाल और बबीता अग्रवाल ने संभाली। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को अपने उज्जवल भविष्य की दिशा में आत्मविश्वास के साथ कदम बढ़ाने में मदद करते हैं।
कार्यशाला में भाग लेने वाली कई युवतियों ने भी खुशी जताई और कहा कि यह अनुभव उनके लिए नया और प्रेरणादायक था। कई ने बताया कि अब वे मेहंदी कला के जरिए न केवल अपना हुनर बढ़ा सकती हैं, बल्कि इसे आर्थिक रूप से भी उपयोग कर सकती हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल समाज में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देती है और युवाओं को रोजगार और रचनात्मक अवसर प्रदान करती है। इस कार्यशाला ने यह संदेश भी दिया कि हुनर, मेहनत और सकारात्मक सोच से कोई भी लड़की अपने जीवन में बदलाव ला सकती है।
रोटरी क्लब एलिगेंस की यह पहल युवतियों के हुनर और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।