रायपुर। डॉ. भीमराव आम्बेडकर जी की 135वीं जयंती के उपलक्ष्य में रायपुर शहर में आयोजित “RAIPUR SINGING TALENT HUNT” कार्यक्रम ने सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले लिया। दो दिवसीय इस भव्य आयोजन में शहर के कोने-कोने से पहुंचे प्रतिभागियों और दर्शकों ने इसे यादगार बना दिया। आयोजन स्थल टाउन हॉल, कलेक्ट्रेट गार्डन में दोपहर से लेकर रात तक सुरों की मधुर गूंज सुनाई देती रही।

कार्यक्रम में समाज के हर वर्ग की भागीदारी देखने को मिली। छोटे बच्चों से लेकर युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों तक सभी ने मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों ने बॉलीवुड, मराठी, भक्ति गीतों सहित विभिन्न शैलियों में अपनी प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का दिल जीत लिया। हर प्रस्तुति के साथ तालियों की गूंज ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया।

जजों की अनुभवी टीम ने न केवल प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया, बल्कि उन्हें गायन के तकनीकी पहलुओं जैसे सुर, ताल, लय, उच्चारण और मंच प्रस्तुति के बारे में भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इससे प्रतिभागियों को अपनी कला को निखारने का अवसर मिला। कई प्रतिभागियों ने बताया कि इस मंच ने उन्हें आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का मौका दिया।
कार्यक्रम को दो वर्गों—ग्रुप A (18 वर्ष तक) और ग्रुप B (40 वर्ष तक)—में विभाजित किया गया था, जिससे सभी आयु वर्ग के प्रतिभागियों को समान अवसर मिल सका। दोनों ही वर्गों में प्रतिभागियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जिसने कार्यक्रम को और अधिक रोचक बना दिया।

इस आयोजन की खास बात यह रही कि सार्वजनिक अम्बेडकर जयंती समारोह रायपुर (छत्तीसगढ़) के अंतर्गत आयोजित इस प्रतियोगिता में स्थानीय प्रतिभाओं के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक समूहों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। विशेष रूप से प्रज्ञा कराओके सिंगिंग ग्रुप टिकरापारा के कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से अलग पहचान बनाई।
ग्रुप के चंद्रशेखर फुलझेले, सुरेश राव लोखंडे और अविनाश फुलझेले ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए फाइनल राउंड में अपनी जगह बनाई। वहीं महिला वर्ग से अरुणा राव लाड़े जी ने भी अपनी मधुर आवाज और सशक्त प्रस्तुति से जजों व दर्शकों का दिल जीतते हुए फाइनल में प्रवेश किया।
कार्यक्रम के दौरान आयोजकों ने बताया कि इस तरह के आयोजन समाज में छिपी प्रतिभाओं को मंच देने के साथ-साथ बाबा साहेब के विचारों—समानता, शिक्षा और सामाजिक एकता—को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।
कुल मिलाकर “RAIPUR SINGING TALENT HUNT” न केवल एक सांस्कृतिक प्रतियोगिता रही, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता, प्रतिभा सम्मान और सामूहिक सहभागिता का एक शानदार उदाहरण बनकर सामने आया। कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि जब मंच मिलता है, तो प्रतिभा खुद अपनी पहचान बना लेती है।सभी चयनित प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं