रायपुर।राजधानी रायपुर के देवेंद्र नगर स्थित डॉ. बाबा साहेब आम्बेडकर सांस्कृतिक भवन (बुद्ध विहार) में रविवार को बौद्ध समाज का भव्य परिचय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में समाज के युवक-युवतियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर एक दूसरे से परिचय प्राप्त किया। सम्मेलन में कुल 80 युवतियां और 95 युवक, यानी लगभग 175 युवक-युवतियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के युवाओं को एक मंच पर लाकर उनके बीच आपसी परिचय, संवाद और वैचारिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना था, ताकि सामाजिक समरसता और पारिवारिक संबंधों को मजबूत किया जा सके।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बुद्ध की सामूहिक वंदना से हुई। उपस्थित सभी लोगों ने श्रद्धा और सम्मान के साथ भगवान बुद्ध के उपदेशों को स्मरण करते हुए समाज में शांति, सद्भाव और समानता के मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया। इसके पश्चात कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों द्वारा कैंडल प्रज्ज्वलन कर सम्मेलन का औपचारिक शुभारंभ किया गया। आयोजन का वातावरण पूरी तरह से सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक गौरव की भावना से परिपूर्ण दिखाई दिया।
इस अवसर पर समाज द्वारा तैयार की गई परिचय पत्रिका का भी विमोचन किया गया। इस पत्रिका का विमोचन रायपुर संभाग के आयुक्त महादेव कावरे के करकमलों से किया गया। परिचय पत्रिका में समाज के युवक-युवतियों की जानकारी, उनके शिक्षा-दीक्षा, व्यवसाय और पारिवारिक पृष्ठभूमि का संक्षिप्त विवरण शामिल किया गया है, जिससे समाज के लोगों को एक दूसरे को समझने और उपयुक्त संबंध स्थापित करने में सुविधा मिल सके।

कार्यक्रम में भारतीय बौद्ध महासभा के पदाधिकारियों और समाज के अनेक प्रमुख लोगों की गरिमामयी उपस्थिति रही। महासभा की राष्ट्रीय ट्रस्टी अलका बोरकर, संजय सेन्द्रे तथा सारंग हुमने विशेष रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज के विकास और एकता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि परिचय सम्मेलन के माध्यम से समाज के युवाओं को एक सकारात्मक दिशा मिलती है और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने का अवसर भी प्राप्त होता है।

इस अवसर पर भारतीय बौद्ध महासभा के प्रदेश अध्यक्ष भोजराज गौरखेड़े और जिला अध्यक्ष प्रकाश रामटेके ने सम्मेलन के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ समाज में कई तरह की चुनौतियां सामने आ रही हैं, ऐसे में समाज के लोगों के बीच संवाद और सहयोग की भावना को बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि परिचय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य युवाओं को एक मंच प्रदान करना है, जहां वे एक दूसरे को समझ सकें और समाज के भीतर अच्छे पारिवारिक संबंध स्थापित हो सकें।
कार्यक्रम में अपर संचालक संजय गजघाटे ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि समाज के युवक-युवतियों को शिक्षा के साथ-साथ रोजगार और व्यवसाय के क्षेत्र में भी आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि रिश्तों के चयन में ऐसे परिवारों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए जो व्यापार या स्वरोजगार से जुड़े हों, ताकि आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण हो सके। उन्होंने युवाओं से मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का संचालन करूणा वासनिक, मंजुषा माटे और अलका बोरकर ने संयुक्त रूप से किया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करते हुए उपस्थित लोगों को कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों से अवगत कराया और वातावरण को उत्साहपूर्ण बनाए रखा।इस आयोजन के मुख्य संयोजक विजय गजघाटे, नरेंद्र बोरकर, जी. एस. मेश्राम, मकरंद घोड़ेस्वर, विजय चौहान, हितेश गायकवाड़ और सपना गजघाटे रहे। इन सभी ने कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने से लेकर उसके सफल संचालन तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।कार्यक्रम को सफल बनाने में समाज के अनेक लोगों ने सक्रिय सहयोग दिया। इनमें राहुल वरके, भावेश परमार, दिव्यश्री करवाडे, भाविन्द्रा भालाधरे, सुनंदा बघेल, संध्या बडोले, मदन मेश्राम, वैशाली दिनेश मेश्राम, निना मेश्राम, विरू मेश्राम, आनंद राऊत, चिंतामणि गढ़पायले, सुधाकर गेडाम, राजेन्द्र वानखेड़े, वैशाली गवई सहित अन्य समाजजनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सभी ने मिलकर आयोजन की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित किया और कार्यक्रम को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाई।
सम्मेलन के दौरान युवक-युवतियों ने अपने-अपने परिचय प्रस्तुत किए, जिससे एक दूसरे को जानने-समझने का अवसर मिला। कई परिवारों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में पारस्परिक विश्वास और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं।कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज के युवाओं को एक सकारात्मक मंच मिलता रहे और बौद्ध समाज की एकता और मजबूती निरंतर बढ़ती रहे।