Thursday, February 19, 2026
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जनपक्षधर पत्रकारिता के लिए सुनील नामदेव सम्मानित

रायपुर। जनसरोकार की पत्रकारिता को सशक्त आवाज़ देने वाले वरिष्ठ पत्रकार सुनील नामदेव को दैनिक समाचारपत्र दैनिक लोकमाया के 16वें स्थापना दिवस पर सम्मानित किया गया। राजधानी रायपुर के सर्किट हाउस रायपुर में आयोजित समारोह में पत्रकारिता, प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।स्वर्गीय श्याम बिहारी भटनागर की स्मृति में दिया गया यह सम्मान सुनील नामदेव को उनकी निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकारिता के लिए प्रदान किया गया। अपने पत्रकारिता जीवन में उन्होंने ग्रामीण और आदिवासी अंचलों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए आम जनता की आवाज़ शासन-प्रशासन तक पहुँचाने का कार्य किया है।सम्मान ग्रहण करते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सच और न्याय की आवाज़ पहुँचाने की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने युवा पत्रकारों से तथ्यपरक और संवेदनशील रिपोर्टिंग करने का आग्रह किया।कार्यक्रम के दौरान “बस्तर का विकास और नक्सलवाद का अंत” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें विकास के साथ संवाद, शिक्षा और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण को आवश्यक बताया गया। चर्चा में सुनील नामदेव के अनुभवों को विशेष रूप से सराहा गया।इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के जीवन पर आधारित पुस्तक का विमोचन उनकी पत्नी रेणु जोगी सहित अन्य अतिथियों द्वारा किया गया। वहीं खेल और समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए महेंद्र धुर्वे तथा हर्षवर्धन को भी सम्मानित किया गया।समारोह में प्रमुख अतिथि के रूप में डॉ. रमन सिंह, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक अजय चंद्राकर, तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता विष्णुदेव साय द्वारा प्रस्तावित थी। विशिष्ट अतिथि के रूप में जय सिंह अग्रवाल और मुख्य वक्ताओं में दुर्गेश माधव अवस्थी तथा राजाराम त्रिपाठी शामिल थे।हालाँकि कुछ कारणों से ये अतिथि कार्यक्रम में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने वीडियो और ऑडियो संदेश के माध्यम से अपनी शुभकामनाएँ और विचार साझा किए।आयोजकों के अनुसार, लोकमाया ने पिछले 16 वर्षों में जनहित के मुद्दों को लगातार प्रमुखता से उठाते हुए जनपक्षधर पत्रकारिता को मजबूत दिशा देने का कार्य किया है। यह स्थापना दिवस समारोह पत्रकारिता, प्रशासन और समाज के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच बनकर सामने आया।

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