रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से मंगलवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां रामकृष्ण केयर अस्पताल परिसर में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान चार मजदूर जहरीली गैस की चपेट में आ गए। इस दर्दनाक हादसे में तीन मजदूरों की मौत हो गई, जबकि एक की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसका इलाज जारी है।
जानकारी के मुताबिक, अस्पताल परिसर में नियमित सफाई कार्य के तहत मजदूरों को सेप्टिक टैंक में उतारा गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही पहला मजदूर टैंक में उतरा, वह कुछ ही मिनटों में अचेत हो गया। उसे बचाने के लिए दूसरा मजदूर नीचे गया, लेकिन वह भी जहरीली गैस के प्रभाव से बेहोश हो गया। इसी तरह तीसरा और चौथा मजदूर भी एक-दूसरे को बचाने के प्रयास में टैंक में उतरे और सभी इसकी चपेट में आ गए।
कुछ देर बाद जब चारों मजदूर बाहर नहीं आए, तो मौके पर मौजूद लोगों को शक हुआ। तत्काल उन्हें बाहर निकाला गया और अस्पताल के अंदर ही इलाज के लिए ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने तीन मजदूरों को मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि टैंक के अंदर जहरीली गैस (संभावित रूप से मीथेन या हाइड्रोजन सल्फाइड) का अत्यधिक स्तर होने के कारण यह हादसा हुआ

हादसे के बाद रामकृष्ण केयर अस्पताल परिसर का माहौल पूरी तरह से गम और अफरा-तफरी में बदल गया। घटना की खबर फैलते ही अस्पताल में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर तरफ चीख-पुकार और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। कुछ समय के लिए अस्पताल की सामान्य सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित रहीं, मरीजों और उनके परिजनों में दहशत का माहौल देखा गया।जैसे ही मृत मजदूरों के परिजनों को इस दर्दनाक हादसे की सूचना मिली, वे बदहवास हालत में अस्पताल पहुंचे। अपनों के शव देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। कई महिलाएं बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ीं, तो वहीं परिजन बार-बार अपने प्रियजनों को पुकारते नजर आए। पूरे परिसर में मातम और चीखों की गूंज सुनाई देती रही, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को झकझोर कर रख दिया।गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। उनका कहना था कि बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के मजदूरों को जान जोखिम में डालकर टैंक में उतारा गया, जो सीधे-सीधे उनकी मौत का कारण बना। कुछ परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद समय पर उचित बचाव और इलाज की व्यवस्था नहीं की गई।

घटना की सूचना मिलते ही टिकरापारा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को घेरते हुए जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। प्रारंभिक तौर पर यह भी सामने आया है कि मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के टैंक में उतारा गया था, जो गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है।
गौरतलब है कि सेप्टिक टैंक या सीवर की सफाई के दौरान जहरीली गैसों के कारण इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जाता। यह हादसा एक बार फिर सिस्टम की लापरवाही और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर है—क्या इस घटना के दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी या यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।